(N/A) समीकरण $i = i_c + i_d$ परिपथ में कुल विद्युत धारा को दर्शाता है,जो चालन धारा $(i_c)$ और विस्थापन धारा $(i_d)$ का योग है।
$1$. चालन धारा $(i_c)$: यह एक चालक के माध्यम से आवेशों (इलेक्ट्रॉनों) के वास्तविक प्रवाह के कारण होने वाली धारा है।
$2$. विस्थापन धारा $(i_d)$: यह वह धारा है जो किसी क्षेत्र में समय के साथ बदलते विद्युत क्षेत्र के कारण उत्पन्न होती है,जैसे कि संधारित्र (कैपेसिटर) की प्लेटों के बीच।
यह समीकरण जेम्स क्लर्क मैक्सवेल द्वारा एम्पीयर के परिपथीय नियम को सामान्य बनाने के लिए प्रस्तावित किया गया था,ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कुल धारा उन क्षेत्रों में भी निरंतर बनी रहे जहाँ कोई भौतिक आवेश प्रवाह नहीं होता है,जैसे कि संधारित्र के अंतराल में।